अगर लंबे समय तक तकिये के कवर और चादर का प्रयोग किया जा रहा है या फिर मधुमेह अनियंत्रित हो गई है तो इससे ब्लैक फंगस होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
एसएन के नाक, कान और गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डा. अखिल प्रताप ने बताया कि कोविड मरीजों में स्टेरायड का अधिक प्रयोग किया गया है। कई बार लोग खुद ही मेडिकल स्टोर से दवाएं लेकर खा रहे हैं। ऐसे में ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ जाता है। स्टेरायड के अधिक इस्तेमाल के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं।
पूर्व में साल में एक से दो मरीज सामने आते थे। यह बीमारी रेयर है। इस बीमारी से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। क्योंकि ब्लैक फंगस के इलाज में जो दवाएं दी जाती हैं, वह हाई डोज की होती हैं। इसका सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है।
डाक्टर की सलाह जरुरी
डाक्टर की सलाह के बाद ही स्टेरायड लें। अगर लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं तो फौरन एसएन इमरजेंसी में पहुंचे। जिले में ब्लैक फंगस के अब तक चार संदिग्ध मरीज सामने आ चुके हैं। इनकी उम्र 40 से 70 साल के बीच है। इन सभी मरीजों में आंखों के चारों ओर सूजन थी।
यह हैं लक्षण :
– नाक से हल्का खून आना
– लगातार सिरदर्द रहना
– दिमाग में भारीपन सा महसूस होना
– आंखों के चारो ओर सूजन
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