मधमुेह की बीमारी कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के लिए घातक रहा है। इस बीच अब यह भी देखा जा रहा है कि स्टेरॉयड के अधिक इस्तेमाल के कारण कोराना के ऐसे मरीजों में भी शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जिन्हें पहले से मधुमेह की बीमारी नहीं है।
इस वजह से यदि शुगर की जांच न हो तो इससे कोरोना की बीमारी गंभीर हो सकती है। यदि मरीज कोरोना से ठीक भी हो जाए, लेकिन यदि शुगर नियंत्रित नहीं है तो आगे चलकर म्यूकरमाइकोसिस का संक्रमण हो सकता है।
संक्रमण के पहले सप्ताह में स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं
इस बाबत इंडोक्रिनालॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. निखिल टंडन ने कहा कि कोरोना, शुगर व स्टेरॉयड का अधिक इस्तेमाल तीनों एक साथ हो तो म्यूकरमाइकोसिस की संभावना बढ़ जाती है। कोरोना की दूसरी लहर में स्टेरॉयड का इस्तेमाल ज्यादा हुआ है। कुछ मरीजों में स्टेरॉयड देना जरूरी भी है। लेकिन इसके लिए दिशा निर्देश स्पष्ट है कि संक्रमण होने के पहले सप्ताह में स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं करना है। कब कितनी डोज दें यह भी बताया गया है। लेकिन मनमाने ढंग से इस्तेमाल से समस्या बढ़ी है।
शुगर की नियमित जांच जरूरी
यदि अस्पताल में भर्ती मरीज की पहले दिन जांच में शुगर सामान्य है और तीन दिन बाद स्टेरॉयड दी जाती है तो शुगर की मात्रा कभी भी बढ़ सकती है, इसलिए शुगर की नियमित जांच जरूरी है।
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