2017 में GAMADA में हुए 1200 करोड़ के फर्जीवाड़े में मुख्य आरोपी सुरिंदर पहलवान के लिंक ट्रांसपोर्ट कारेाबारी व फास्ट वे केबल कंपनी के मालिक गुरदीप सिंह के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बाद इनकम टैक्स (IT) ने भी जांच शुरू कर दी है। जांच के दूसरे दिन IT के 24 अधिकारी गुरदीप सिंह के घर पर पहुंचे हैं।
प्रवर्तन निदेशालय शहर में गुरदीप सिंह के घर समेत 4 जगहों पर जांच कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, ED अधिकारियों ने गुरदीप सिंह और उनके स्टाफ से बैंक डिटेल से लेकर दूसरी तरह के रिकॉर्ड की मांग की है और यह रिकॉर्ड उन्हें मुहैया करवाया गया है। यह भी जानकारी मिल रही है कि उनके कार्यालयों में अकाउंट डिपार्टमेंट में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटरों की भी जांच हो रही है।
वहीं पिछले समय में हुए लेन-देन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। सूत्र बता रहे हैं कि पंजाब में ED ने कई जगह पर छापा मारा है। मामला 2017 स्टेट विजिलेंस टीम की ओर से दर्ज केस से जुड़ा है और ठेके देने के मामले में बड़े घोटाले का है। इस मामले को ED ने अपने हाथ में ले लिया है। इसके तहत ही यह कार्रवाई की जा रही है।
बताया जा रहा है कि टीम को यहां से बड़ी मात्रा में नगदी मिली है और इसकी जांच के लिए IT को बुलाया है। ED टीम गुरुवार सुबह उनके घर पहुंची और जांच शुरू की। टीमें उनके घर और फास्ट-वे कार्यालय पर जांच कर रही हैं। गुरदीप सिंह अकाली अध्यक्ष सुखबीर बादल के काफी नजदीकी भी हैं और सुरिंदर पहलवान भी शिरोमणि अकाली दल बादल का बेहद नजदीकी रहा है। इस रेड से पंजाब की राजनीति में बड़ा उबाल आने की चर्चाएं गर्म हैं।
क्या है 2017 GMADA का गबन मामला
ED के सूत्रों के मुताबिक, वह ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के पूर्व चीफ इंजीनियर सुरिंदर पाल सिंह के साथ गुरदीप जुझार के लिंक की जांच कर रहे हैं। सुरिंदरपाल उर्फ पहलवान अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल का करीबी रहा है। उसे जालंधर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में नामजद किया था। यह केस पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की जांच के बाद दर्ज किया था। विजिलेंस ब्यूरो ने 9 जून 2017 को पहलवान को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ जांच में पता चला था कि उसने गलत रेट पर 1200 करोड़ के काम अलॉट किए।
उस पर बोगस फर्म और फैमिली मेंबर के अकाउंट में ब्लैक मनी जमा कराने का आरोप है। सुरिंदरपाल पहलवान ने 1993 में जूनियर इंजीनियर के तौर पर पंजाब मंडी बोर्ड जॉइन किया था। इसके बाद 2014 में वह गमाडा में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर बना। फिर 2016 में उसे कार्यकारी चीफ इंजीनियर बना दिया गया।
सितंबर 2019 में विजिलेंस ब्यूरो ने उसकी 59 प्रॉपर्टी अटैच की थी, जिनकी कीमत करीब 26 करोड़ रुपए थी। यह कार्रवाई मोहाली कोर्ट के आदेश पर की गई थी। इस मामले में विजिलेंस 4 चालान भी कोर्ट में पेश कर चुका है।
विजिलेंस ब्यूरो की जांच में सामने आया था कि सुरिंदर पहलवान ने अपने परिवार वालों के नाम पर 3 बोगस कंपनियां बनाई थीं। इसमें कई करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। GMADA में रहते सुरिंदर पहलवान ने 200 से ज्यादा प्रोजेक्टों में अपनी पसंदीदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया।
उन्होंने ‘इक ओंकार’ बिल्डर्स एंड कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. बनाई और उसे अवैध तरीके से वर्क ऑर्डर अलॉट किए। यह कंपनी लुधियाना के गोबिंद नगर में एक घर से चल रही थी। इसके जरिए करीब 400 करोड़ की हेराफेरी की गई। इसके अलावा उसने लुधियाना, रोपड़, मोहाली और चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी खरीदी थी। विजिलेंस ब्यूरो ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत केस दर्ज किया।
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